आज के लेख में हम बताएंगे कि कैसे भारतीय दुनिया के सबसे गंदे आदमी हैं ? भारतीय जन समुदाय में अनपढ़, गरीब इनकी संख्या अधिक होने से उनके अंदर सामान्य चीजों के प्रति भी जागरूकता नहीं देखी जाती है। इसके लिए जिम्मेदार है यहां की व्यवस्था, यहां अयोग्य लोगों का शासन है ,यहां की सरकारें जाति धर्म और निजी स्वार्थ से ऊपर उठ नहीं पा रही है। पूरे देश को देखने के बाद यही मालूम होता है जितने जिम्मेदार लोग हैं उसमें से एक प्रतिशत लोग भी पढ़े लिखे नहीं है क्योंकि पढ़ा लिखा व्यक्ति जाति धर्म जैसी निराधार बात को मानता ही नहीं है। क्योंकि यह मूर्खता एवं अंधविश्वास का मार्ग है। यहां का शासक वर्ग यहां की जनता को जान बूझकर अशिक्षित और लाचार बनाकर रखा है जिससे कि शासन करना आसान हो जाए। इसलिए दुनिया में भारत की छवि बहुत ही खराब दिखती है। ऐसे ही एक अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी द्वारा अध्ययन एवं विश्लेषण पर यह पाया गया है कि भारत के लोग अजागरूक एवं बेहद लापरवाह होते हैं।
इसके बारे में आईये और जानकारी प्राप्त करते हैं
जहां पूरे दुनिया में जल संचय एवं जल शुद्धता की बात हो रही है उसके लिए भिन्न-भिन्न प्रभावी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं परंतु भारत में ढोंग एवं अंधविश्वास के कारण से इसके साथ साथ मूर्खतापूर्ण व्यवस्था के कारण से लगातार नदियों के पानी को गंदा किया जा रहा है। एक बड़ा वर्ग समुदाय जो इस पर चिंता करता रहा है कि जल संकट का आखिरकार कारण क्या है तो बात सामने आती है, वह है जल प्रदूषण।
जहरीले कीटनाशक पदार्थ एवं रासायनिक खादों का नाइट्रेट भूजल में लगातार मिल रहा है, बढ़ते उद्योगों से निकाला गया वेस्ट पदार्थ और गंदगी अधिकतर नदियों में गिरायी जा रही है। इससे नदियां गंदे नालों में बदल चुकी है। इसके अलावा पूरे शहर का कचरा नदियों में गिराया जा रहा है।
नदियों के गंदगी के हिसाब से सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (center for science and environment ) के अनुसार पांचवें नागरिक को पर्यावरण रिपोर्ट मे भारतीयों को सबसे गंदे आदमी की उपाधि दे चुकी है। सन 1990 के दशक में भारत में 10 लाख से ज्यादा बच्चे एवं नागरिक जल जनित रोगों से अकाल मृत्यु के शिकार हुए।
आजादी के बाद से अब तक गंदे पानी की वजह से 5 करोड़ से ज्यादा बच्चे जान गंवा चुके हैं। गंगा एक्शन प्लान ( GAP ) से पहले गंगा में 87 करोड़ 30 लाख लीटर गंदगी हर रोज बहाई जा रही थी।
एक छोटी सी नदी साबरमती भी अहमदाबाद शहर का 99 करोड़ 80 लाख लीटर गंदा पानी हर रोज ढ़ो रही है।
इस प्रकार कहा जा सकता है की नदियों के गंदा होने का कारण यहां की कंपनियां, कारखाने एवं यहां के लोग ही हैं।